🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩
※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹❄श्री राधाकृष्ण लीलामाधुर्य❄🌹
🌹 श्रीराधा कृष्ण की मधुर-लीलाएँ :
🌹 श्रीसाँझी-लीला :
( गत ब्लाग से आगे )
सखी-
हँसि ललिता तब कह्यौ स्याम सौं, ये बृषभान-दुलारी ।
तिहारौ कहा लगै या बन में, रोकत गैल हमारी ।।2।।
श्रीकृष्ण-
स्याम सखा सखियन समुझावैं, हठ न करौ तुम प्यारी ।
फल-द्रुम, बन-बाटिका-सबनि के हमहीं हैं रखवारी ।।3।।
(कबित्त)
ऐसे या सघन बन निरजन के माँहि मैं,
आवती हू जानी नाहिं, जानी जब गाई हौ।
और है न संग कोऊ, एक-जाति जुबती सब,
बिनहीं बिचारैं जोर जोबन के धाई हौ ।।
अब फिरि जाहु आप-आपने भवन सब,
ठौर सु इकौसी फिरौ मदन-दुहाई हौ।
कैधौं तुम नागरी! हमैं समुझाय कहौ,
कौन की पठाई यहाँ, कौन काज आई हौ।।
अरी! तुम कौन हौ? कहाँ सौं आई हौ? मोय तिहारे आयवे की खबरहू नायँ परी, तिहारे संग पुरुषहू नायँ है, तुमकूँ यहाँ कौन नें भेज्यौ है और कहा आज सौं या निरजन बन में आई हौ?
सखी-
फूलन के बीनिबे कूँ आईं इहिं बन मिलि,
बूझिबे की हियें ऐसी धरनि व क्यौं धरी ।
टेढ़े ह्वै कैं ठाड़े, छली छैल! रोपि कैं छरी ।।
उचित नहीं, यहाँ अकेले रहौ जुबतिन में,
नागर! निकसि जाहु याही साँकरी गरी।
नाँ तौ अनबोले रहौ, छाँड़ौ मग मेरौ, हम
आबैंगी हजार बेर, तुम कौं कहाँ परी ।।
अजी! हम फूल बीनिबे कूँ आई हैं, आप हमें टोकिवे वारे को हौ? आपकी टेढ़ी चितवनि है, और टेढ़ी बात करौ हौ। और छरी हाथ में लैकैं टेढ़े हैंकै हमारी गैल रोकि कैं ठाड़े हौ। सखीन के बीच में रहनौ आपकूँ उचित नायँ है; यदि यहाँ रहनौ ही होय तौ चुपचाप ठाड़े रहौ। हम यहाँ हजार बार आवैंगी। तुमकूँ कहा परी या बात ते?
( शेष आगे के ब्लाग में )
※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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🌹: कृष्णा : श्री राधा प्रेमी : 🌹
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अब फिरि जाहु आप-आपने भवन सब,
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कैधौं तुम नागरी! हमैं समुझाय कहौ,
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अरी! तुम कौन हौ? कहाँ सौं आई हौ? मोय तिहारे आयवे की खबरहू नायँ परी, तिहारे संग पुरुषहू नायँ है, तुमकूँ यहाँ कौन नें भेज्यौ है और कहा आज सौं या निरजन बन में आई हौ?
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फूलन के बीनिबे कूँ आईं इहिं बन मिलि,
बूझिबे की हियें ऐसी धरनि व क्यौं धरी ।
टेढ़े ह्वै कैं ठाड़े, छली छैल! रोपि कैं छरी ।।
उचित नहीं, यहाँ अकेले रहौ जुबतिन में,
नागर! निकसि जाहु याही साँकरी गरी।
नाँ तौ अनबोले रहौ, छाँड़ौ मग मेरौ, हम
आबैंगी हजार बेर, तुम कौं कहाँ परी ।।
अजी! हम फूल बीनिबे कूँ आई हैं, आप हमें टोकिवे वारे को हौ? आपकी टेढ़ी चितवनि है, और टेढ़ी बात करौ हौ। और छरी हाथ में लैकैं टेढ़े हैंकै हमारी गैल रोकि कैं ठाड़े हौ। सखीन के बीच में रहनौ आपकूँ उचित नायँ है; यदि यहाँ रहनौ ही होय तौ चुपचाप ठाड़े रहौ। हम यहाँ हजार बार आवैंगी। तुमकूँ कहा परी या बात ते?
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