रविवार, 11 सितंबर 2016

🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

 🌹❄श्री राधाकृष्ण लीलामाधुर्य❄🌹

🌹 श्रीराधा कृष्ण की मधुर-लीलाएँ :
🌹 श्रीसाँझी-लीला :

( गत ब्लाग से आगे )

(ठाकुरजी, दोऊ हाथन की अँजुरी बाँधि श्रीजी सौं रखवारी माँगैं)

समाजी-

(कबित्त)

साहस सँभारि स्याम आगैं आए प्यारी जू के,
रूप कौ अतुल भार परत न सह्यौ है।
बीच नील अंबर के बदन मयंक लखि,
चकित चितौन नें चकोर बृत्ति लह्यौ है।।
पायँ डुगलात जात, पीत पट छूटि गयौ,
नागरिया परत हियें धीरज न गह्यौ है।
पगे रूप चैननि में बैन न फुरत मन,
लियौ चाहैं हाथ मन, हाथ में न रह्यौ है।।
फूलन कौं गईं उत सखी सब जहाँ-तहाँ,
इत कौं रँगीले कछू और ढार में ढरे ।
रसिक रसाल बाल दियौ चाहै उर माल,
तब नन्दलाल हँसि आगैं हाथ लै करे।।
उरझी चितौन, कंप, स्वेद, स्वर भंग भए,
नागरिया नागर अनंग-रंग सौं भरे।
राधे जू दियौ हार मोतिन कौ मोहन कौं,
मोहन जू हार होय राधे के गरैं परे।।

(श्रीजी प्रीतम कूँ मोतिन कौ हार पहिरावैं, दोनों मिलि कैं कुंज में पधारे)

समाजी-

पद (राग केदारौ, ताल धमार)

रस भरे पिय-प्यारी बैठे कुसुम भवन ।
कुसुमन की सेज, और कुसुम बितान तने,
तैसोई सीत-मंद-संगध पवन ।।
कुसुमन के आभूषन, कुसुमन के परदा, कुसुमन केबीजना,
गुंजत अलि, पिक री सुख स्रवन।
गोबिंद बलि-बलि जोरी सदाईं बिराजौ,
सुख बरषत लालन राधिका-रवन।।

( शेष आगे के ब्लाग में )

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 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
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